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बिहार मे अवैध नर्सिंग होम का बिछ रहा हैँ मकर जाल, स्वास्थ्य विभाग चुप, मरीज को हो रही हैँ मौते
बिहार मे अवैध नर्सिंग होम का बिछ रहा हैँ मकर जाल, स्वास्थ्य विभाग चुप, मरीज को हो रही हैँ मौते
Category: गया | Date: 01 Jun 2026 | 👁️ Views: 55
बिहार में अवैध नर्सिंग होमों के संचालन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। गया जिले में भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कई ऐसे नर्सिंग होम संचालित होने के आरोप लगते रहे हैं, जिनके पास आवश्यक लाइसेंस और मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े किए जाते हैं। इसी बीच गया शहर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक कथित अवैध नर्सिंग होम के संचालन का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
वायरल वीडियो गया शहर के पुराना जीबीएम कॉलेज के समीप स्थित एक दो मंजिला भवन का बताया जा रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि यहां बिना किसी स्पष्ट अस्पताल या नर्सिंग होम के बोर्ड के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। भवन के बाहर केवल एक अल्ट्रासाउंड सेंटर का बोर्ड दिखाई देता है, जबकि अंदर कई मरीज भर्ती होने और ऑपरेशन के बाद उपचाररत होने की बात कही जा रही है।
वीडियो बनाने वाले लोगों का दावा है कि यहां भर्ती मरीजों के परिजनों को इलाज और ऑपरेशन करने वाले चिकित्सकों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। वहीं आसपास के कुछ लोगों का भी आरोप है कि इस तरह के संस्थानों में स्वास्थ्य मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।
स्थानीय लोगों और कुछ मरीजों के परिजनों का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को बेहतर और कम खर्च में इलाज का भरोसा देकर निजी संस्थानों में भर्ती कराया जाता है। आरोप यह भी है कि इलाज शुरू होने के बाद मरीजों को भारी भरकम बिल थमा दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित भवन के आसपास सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थान मौजूद हैं, बावजूद इसके मरीजों को कथित रूप से दूसरे स्थानों से यहां लाया जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की जांच कब होगी और यदि संबंधित संस्थान बिना अनुमति के संचालित पाया जाता है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग, सिविल सर्जन कार्यालय और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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